दिनांक: 23 फरवरी 2026 | स्थान: सिविल कोर्ट परिसर, बक्सर (Vidhik Seva Sadan हॉल)
नशा आज केवल एक व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि सामाजिक, पारिवारिक और विधिक चुनौतियों से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। इसी संवेदनशील मुद्दे पर 23 फरवरी 2026 को सिविल कोर्ट, बक्सर स्थित DLSA हॉल में “नशा मुक्ति: जागरूकता, रोकथाम एवं पुनर्वास” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम DAWN Program (Drug Awareness and Wellness Navigation) के अंतर्गत आयोजित हुआ।
इस सेमिनार का संयुक्त आयोजन District Legal Services Authority, Buxar एवं Buxar Medical City Foundation द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य नशा उन्मूलन के लिए न्यायपालिका, चिकित्सा तंत्र और समाज के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना था।

उद्घाटन सत्र: न्यायपालिका का संवेदनशील संदेश
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। जिला एवं सत्र न्यायाधीश Kajal Jhamb ने सेमिनार का औपचारिक उद्घाटन करते हुए कहा कि नशा पीड़ित व्यक्ति को अपराधी नहीं, बल्कि उपचार की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि समाज, न्यायपालिका और चिकित्सा संस्थान मिलकर कार्य करें तो नशा उन्मूलन की दिशा में ठोस परिणाम संभव हैं।
मंच पर उपस्थित न्यायिक पदाधिकारियों एवं बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी नशे के सामाजिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला और पुनर्वास केंद्रों की आवश्यकता पर बल दिया।

DAWN Program की रूपरेखा: समन्वित मॉडल की प्रस्तुति
Buxar Medical City Foundation के निदेशक Ram Narayan ने DAWN Program की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पहचान (Identification), परामर्श (Counselling), उपचार (Treatment), विधिक सहयोग (Legal Aid) और पुनर्स्थापन (Rehabilitation) को एकीकृत रूप से जोड़ा गया है।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नशा मुक्ति के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिसमें परिवार, समाज और संस्थागत सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

विधिक सहायता की भूमिका: न्याय तक सहज पहुंच
DLSA की सचिव Neha Dayal ने अपने संबोधन में बताया कि नशा प्रभावित व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधिक सेवा प्राधिकरण केवल न्यायिक सहायता ही नहीं, बल्कि पुनर्वास प्रक्रिया में भी सहयोग प्रदान करता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में नशा घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और आपराधिक मामलों से जुड़ जाता है, ऐसे में पुनर्वास आधारित दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण: नशा एक मानसिक स्वास्थ्य चुनौती
सदर अस्पताल, बक्सर के मनोवैज्ञानिक श्री के. के. पांडेय ने नशे के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रभावों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि नशा एक “क्रॉनिक रिलैप्सिंग डिसऑर्डर” है, जिसका उपचार संभव है, बशर्ते समय पर पहचान और निरंतर परामर्श उपलब्ध हो।
उन्होंने परिवार की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सहानुभूति, सहयोग और सकारात्मक वातावरण से नशा पीड़ित व्यक्ति को पुनः सामान्य जीवन की ओर लौटाया जा सकता है।

सहभागिता और संकल्प
कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली, कानूनी संरक्षण और पुनर्वास प्रक्रिया से जुड़े प्रश्न पूछे। इससे कार्यक्रम और अधिक संवादात्मक एवं उपयोगी बना।
विशेष आकर्षण के रूप में नशा मुक्ति विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। अंत में सभी उपस्थितजनों ने नशा मुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प लिया।

समापन: एक सकारात्मक पहल
यह सेमिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत का संकेत था। न्यायपालिका, चिकित्सा क्षेत्र और सामाजिक संगठनों के समन्वय से बक्सर जिले में नशा उन्मूलन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
DAWN Program के माध्यम से Buxar Medical City Foundation ने यह संदेश दिया है कि नशा मुक्ति केवल उपचार नहीं, बल्कि जागरूकता, सहानुभूति और सामूहिक जिम्मेदारी का विषय है।
Buxar Medical City Foundation
बक्सर, बिहार
📞 9835651993